Thursday, February 5, 2009

जिंदगानी वफ़ा न करे?



मत सोचो ऐसा कभी भी,
न रब ने चाहा न हम,
मिलेंगे नही थो क्या हुआ,
मिट जायेंगे तुज्मे सनम।

यह सिर्फ़ बातें नही, जस्बादी में,
यदि आप कहे, थो निबाते हैं हम,
यह सिर्फ़ कहना नही, हुकुम्मत होगी आपकी,
वैसे, थो आपके सेवक है हम।

पर, प्यार की बात जब आए, थो राजा है हम,
रानी बनी हो आप, जब से मिले हो, सनम।

4 comments:

लाल और बवाल (जुगलबन्दी) said...

हिन्दी को अंतरजाल पर समृद्ध करने के लिए आपका यह प्रयास अति सराहनीय है. आपका स्वागत है. नियमित लेखन के लिए शुभकामनाऐं.

Abhishek said...

Sundar, Swagat.

संगीता पुरी said...

बहुत सुंदर…आपके इस सुंदर से चिटठे के साथ आपका ब्‍लाग जगत में स्‍वागत है…..आशा है , आप अपनी प्रतिभा से हिन्‍दी चिटठा जगत को समृद्ध करने और हिन्‍दी पाठको को ज्ञान बांटने के साथ साथ खुद भी सफलता प्राप्‍त करेंगे …..हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

रचना गौड़ ’भारती’ said...

सुंदर रचना
भावों की अभिव्यक्ति मन को सुकुन पहुंचाती है।
लिखते रहि‌ए लिखने वालों की मंज़िल यही है ।
कविता,गज़ल और शेर के लि‌ए मेरे ब्लोग पर स्वागत है ।
मेरे द्वारा संपादित पत्रिका देखें
www.zindagilive08.blogspot.com
आर्ट के लि‌ए देखें
www.chitrasansar.blogspot.com